सबसे ज़रूरी बात पहले: हर विषय में पास होने के लिए थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट, दोनों में अलग-अलग कम से कम 33% मार्क्स लाना ज़रूरी है — सिर्फ कुल मिलाकर 33% होना काफी नहीं है। यही वो बात है जो हर साल सबसे ज़्यादा कन्फ्यूज़न पैदा करती है, इसलिए इसे शुरू में ही साफ कर देते हैं।
थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट में मार्क्स का बंटवारा
Class 10 के ज़्यादातर मुख्य विषयों (जैसे हिंदी, अंग्रेज़ी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान) में कुल 100 मार्क्स को इस तरह बांटा जाता है:
- 80 मार्क्स — बोर्ड की थ्योरी परीक्षा (3 घंटे का पेपर, बाहर से जांचा जाता है)
- 20 मार्क्स — इंटरनल असेसमेंट / प्रैक्टिकल (स्कूल स्तर पर तय होता है)
Class 12 में यह बंटवारा विषय के हिसाब से बदल जाता है। जिन विषयों में प्रैक्टिकल होता है (जैसे साइंस के विषय, कंप्यूटर साइंस), वहां आमतौर पर 70 मार्क्स थ्योरी + 30 मार्क्स प्रैक्टिकल/इंटरनल का पैटर्न होता है, जबकि कई नॉन-प्रैक्टिकल विषयों में अब भी 80+20 का ही ढांचा चलता है। असल स्प्लिट हमेशा CBSE की उस विषय की करिकुलम डॉक्यूमेंट में दिया होता है, इसलिए अपने विषय की सही जानकारी स्कूल या CBSE की वेबसाइट से ज़रूर देख लें।
पास होने के लिए कितने मार्क्स चाहिए
नियम सीधा है, लेकिन ध्यान से समझना ज़रूरी है: थ्योरी और इंटरनल, दोनों में अलग-अलग कम से कम 33% लाना अनिवार्य है।
- 80 मार्क्स की थ्योरी में पास होने के लिए कम से कम 27 मार्क्स चाहिए।
- 20 मार्क्स के इंटरनल में पास होने के लिए कम से कम 7 मार्क्स चाहिए।
- 70+30 वाले विषयों (जैसे Class 12 की साइंस स्ट्रीम) में थ्योरी में 23 और प्रैक्टिकल में 10 मार्क्स ज़रूरी हैं।
यानी अगर किसी छात्र को थ्योरी में 30 मार्क्स मिले लेकिन इंटरनल में सिर्फ 5, तो कुल मिलाकर 33% से ज़्यादा होने के बावजूद वह उस विषय में फेल माना जाएगा — क्योंकि इंटरनल का हिस्सा अलग से पास नहीं हुआ। पासिंग हर विषय के हिसाब से तय होती है; पूरे रिज़ल्ट के लिए किसी एक “ओवरऑल एग्रीगेट प्रतिशत” की शर्त नहीं होती — छात्र को हर विषय में अलग-अलग पास होना होता है।
9-पॉइंट ग्रेडिंग स्केल कैसे काम करता है
CBSE का ग्रेडिंग सिस्टम फिक्स्ड मार्क्स-रेंज (जैसे 91-100 = A1) पर आधारित नहीं, बल्कि पोज़िशनल यानी रिलेटिव है। मतलब, हर विषय में पास हुए सभी छात्रों को उनके मार्क्स के हिसाब से देशभर में क्रम में रखा जाता है, और फिर टॉप 1/8वां हिस्सा A1, अगला 1/8वां हिस्सा A2 — इसी तरह आगे बढ़ते हैं।
| ग्रेड | स्थिति (पास हुए छात्रों में) | ग्रेड पॉइंट |
|---|---|---|
| A1 | टॉप 1/8वां हिस्सा | 10 |
| A2 | अगला 1/8वां हिस्सा | 9 |
| B1 | अगला 1/8वां हिस्सा | 8 |
| B2 | अगला 1/8वां हिस्सा | 7 |
| C1 | अगला 1/8वां हिस्सा | 6 |
| C2 | अगला 1/8वां हिस्सा | 5 |
| D | बचा हुआ हिस्सा (फिर भी पास) | 4 |
| E | 33% से कम मार्क्स (फेल / Essential Repeat) | — |
यानी दो अलग-अलग सालों में एक जैसे मार्क्स लाने पर भी ग्रेड अलग आ सकता है, क्योंकि यह उस साल देशभर के छात्रों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है, सिर्फ आपके अपने मार्क्स पर नहीं।
CGPA से पर्सेंटेज कैसे निकालें
Class 10 की मार्कशीट पर छात्र की CGPA सबसे अच्छे 5 विषयों के ग्रेड पॉइंट्स के औसत से निकाली जाती है। इसे अनुमानित प्रतिशत में बदलने के लिए CBSE का इंडिकेटिव फॉर्मूला है:
प्रतिशत ≈ CGPA × 9.5
उदाहरण के लिए, 9.2 CGPA का मतलब लगभग 87.4% होगा। ध्यान रहे, यह फॉर्मूला सिर्फ अनुमान के लिए है — एडमिशन आदि के लिए स्कूल या संस्थान इसी फॉर्मूले से आधिकारिक प्रतिशत निकालते हैं।
क्या CBSE अब भी ओवरऑल डिवीजन या मेरिट लिस्ट देता है?
नहीं। CBSE ने 2003 से ही टॉपर्स की आधिकारिक लिस्ट और मेरिट पोज़िशन घोषित करना बंद कर दिया था, और मार्कशीट पर “फर्स्ट/सेकंड/थर्ड डिवीज़न” जैसा कोई आधिकारिक लेबल नहीं दिया जाता। Class 10 का रिज़ल्ट ग्रेड और CGPA के रूप में आता है, जबकि Class 12 की मार्कशीट पर विषयवार मार्क्स दिए जाते हैं जिनसे प्रतिशत खुद निकाला जा सकता है — लेकिन कोई ऑफिशियल ओवरऑल डिवीज़न या रैंक CBSE की तरफ से घोषित नहीं होती।
2026-27 सेशन में नया क्या है
2026-27 सेशन से Class 10 के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था लागू है। पहली परीक्षा सभी के लिए अनिवार्य होती है, जबकि दूसरी परीक्षा सिर्फ उन विषयों के लिए वैकल्पिक होती है जिनमें बाहरी (थ्योरी) मार्क्स का हिस्सा 50% से ज़्यादा है। इंटरनल/प्रैक्टिकल असेसमेंट सिर्फ एक बार होता है और उसके मार्क्स दोनों अटेम्प्ट में साथ जुड़ते हैं। दोनों में से जो भी बेहतर स्कोर हो, फाइनल रिज़ल्ट में वही गिना जाता है। Class 12 में अभी भी सालाना एक ही बोर्ड परीक्षा होती है।
घबराने की बात नहीं — नियम भले ही थोड़े पेचीदा लगें, लेकिन असल फॉर्मूला सीधा है: हर विषय में थ्योरी और इंटरनल दोनों में मेहनत से 33% पार करो, बाकी ग्रेड अपने-आप संभल जाएगा। तैयारी में लगे रहो, और खुद पर भरोसा रखो!
आगे पढ़ें: अपनी तैयारी परखने के लिए पिछले सालों के प्रश्न पत्र यहाँ हल करें।
