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सीबीएसई कक्षा 10 री-अटेम्प्ट नियम 2026: पूरी जानकारी

सीबीएसई की नई साल में दो बार होने वाली बोर्ड परीक्षा व्यवस्था में, केवल वे छात्र जो पहली परीक्षा (फरवरी–मार्च 2026) में पास हुए हैं, दूसरी परीक्षा (मई 2026) में अधिकतम 3 विषयों में दोबारा बैठकर अपने अंक सुधार सकते हैं — और सीबीएसई दोनों प्रयासों में से जो भी अंक ज्यादा हों, उन्हीं को मार्कशीट पर दर्ज करता है। यही एक नियम अभिभावकों और छात्रों को सबसे ज्यादा उलझाता है, इसलिए यहां हर सवाल का साफ जवाब दिया गया है।

दो-परीक्षा प्रणाली को संक्षेप में समझें

सत्र 2025-26 से सीबीएसई कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित हो रही है:

  • पहली परीक्षा (फेज़ 1): फरवरी–मार्च 2026 में होगी और इसमें पूरा सिलेबस शामिल होगा। यह परीक्षा कक्षा 10 के हर छात्र के लिए अनिवार्य है — इससे बचने का कोई विकल्प नहीं है।
  • दूसरी परीक्षा (फेज़ 2): मई 2026 में होगी। यह पूरी तरह वैकल्पिक है, और सिर्फ उन छात्रों के लिए है जो अपने अंक सुधारना चाहते हैं या जिनका कंपार्टमेंट आया है।

दूसरी परीक्षा में कौन बैठ सकता है

मई की परीक्षा में बैठने की पात्रता पूरी तरह आपके पहले फेज़ के परिणाम पर निर्भर करती है:

  • अगर आप पहली परीक्षा के सभी विषयों में पास हुए हैं, तो आप सिर्फ अंक सुधारने के लिए अधिकतम 3 विषयों में दोबारा बैठ सकते हैं।
  • अगर आप 1 या 2 विषयों में फेल हुए हैं (यानी कंपार्टमेंट आया है), तो आप उन्हीं विषयों को पास करने के लिए दूसरी परीक्षा में बैठ सकते हैं। यह सिर्फ सुधार का मौका नहीं, बल्कि पास होने का असली दूसरा मौका है।
  • अगर आप 3 या उससे ज्यादा विषयों में फेल हुए हैं, तो आप दूसरी परीक्षा के लिए पात्र नहीं हैं। ऐसे में अगले सत्र में आपको कक्षा 10 की परीक्षा दोबारा नए सिरे से देनी होगी।

यह भी ध्यान रखें कि दूसरी परीक्षा सिर्फ उन्हीं विषयों के लिए होती है जिनमें सीबीएसई की लिखित परीक्षा का वेटेज 50% से ज्यादा हो — आमतौर पर विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषय। ज्यादातर इंटरनल या प्रैक्टिकल आधारित विषयों में दोबारा मौका नहीं मिलता।

कितने विषयों में दोबारा बैठ सकते हैं

सुधार के लिए अधिकतम सीमा 3 विषय है। सभी 3 विषयों में बैठना जरूरी नहीं — जो छात्र सिर्फ 1 या 2 विषयों में सुधार चाहता है, वह उतने ही विषय चुन सकता है। पूरी सीमा का इस्तेमाल करना अनिवार्य नहीं है। एक अतिरिक्त सुविधा यह है कि गणित में छात्र दोबारा परीक्षा देते समय स्टैंडर्ड और बेसिक लेवल के बीच बदलाव कर सकता है; बाकी किसी विषय में ऐसा बदलाव मान्य नहीं है।

अंतिम अंक कैसे तय होते हैं

यही वह हिस्सा है जिसे ज्यादातर छात्र गलत समझ लेते हैं। दूसरी परीक्षा में दोबारा दिए गए किसी भी विषय के लिए सीबीएसई दोनों प्रयासों में से बेहतर अंक दर्ज करता है — दूसरी बार के अंक अपने आप मान्य नहीं हो जाते। अगर किसी छात्र को फरवरी में 72 और मई में 68 अंक मिलते हैं, तो फाइनल मार्कशीट पर 72 ही रहेंगे। फरवरी वाला स्कोर कभी खत्म नहीं होता — दूसरा प्रयास सिर्फ फायदा दे सकता है, नुकसान कभी नहीं।

फीस और जरूरी तारीखें

स्कूल दूसरी परीक्षा के लिए छात्रों की सूची (LOC) सीबीएसई की तय समयसीमा में जमा करते हैं, जो आमतौर पर अप्रैल में होती है, और कुछ अतिरिक्त दिनों तक लेट फीस के साथ जमा करने की सुविधा भी मिलती है। परीक्षा शुल्क प्रति विषय लिया जाता है, तीनों विषयों में एक साथ आवेदन करने पर संयुक्त शुल्क कुछ कम होता है; LOC की आखिरी तारीख छूटने पर अतिरिक्त लेट फीस लगती है। स्कूल इस प्रक्रिया के लिए सीबीएसई के तय शुल्क से ज्यादा कुछ नहीं ले सकते — सटीक शुल्क और तारीखों के लिए cbse.gov.in पर जारी नवीनतम सर्कुलर जरूर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मुझे सभी 3 विषयों में दोबारा बैठना जरूरी है, या मैं सिर्फ 1 विषय चुन सकता हूं?

आप 3 तक कितने भी विषय चुन सकते हैं — 1, 2 या 3। पूरी सीमा का इस्तेमाल करने की कोई बाध्यता नहीं है।

क्या दूसरी परीक्षा के लिए कोई फीस देनी होती है?

हां। सीबीएसई दूसरी परीक्षा के लिए प्रति विषय शुल्क लेता है, जो LOC जमा करते समय स्कूल के माध्यम से भरा जाता है। अलग से ज्यादा लेट फीस सिर्फ तब लगती है जब स्कूल तय समयसीमा में LOC जमा नहीं कर पाता।

अगर मैं पहली परीक्षा में किसी विषय में फेल हो जाऊं, तो क्या मैं दूसरी परीक्षा बिल्कुल नहीं दे पाऊंगा?

नहीं — यह अपने आप नहीं होता। अगर आप 1 या 2 विषयों में फेल होते हैं तो आपको कंपार्टमेंट मिलती है, और आप उन्हीं विषयों को पास करने के लिए दूसरी परीक्षा में बैठ सकते हैं। सिर्फ 3 या उससे ज्यादा विषयों में फेल होने पर ही आप दूसरी परीक्षा के लिए अपात्र होते हैं; ऐसे में अगले साल दोबारा परीक्षा देनी होगी।

अगर मैं जिस विषय में दोबारा बैठा, उसमें पहले से कम अंक आए तो क्या होगा?

घबराने की जरूरत नहीं है — उस विषय में आपका पहला (फरवरी वाला) स्कोर ही मान्य रहेगा। सीबीएसई दोनों में से ज्यादा अंक दर्ज करता है, इसलिए कमजोर दूसरा प्रयास आपके अंक कम नहीं कर सकता।

क्या मैं एक ही सत्र में किसी विषय की परीक्षा तीसरी बार दे सकता हूं?

नहीं। एक शैक्षणिक सत्र में हर विषय की परीक्षा अधिकतम दो बार ही दी जा सकती है — एक बार पहली परीक्षा में और एक बार दूसरी में। तीसरा मौका नहीं मिलता।

क्या मैं दूसरी परीक्षा में अपने विषय बदल सकता हूं?

नहीं, गणित के स्टैंडर्ड/बेसिक लेवल बदलने को छोड़कर विषय बदलने की अनुमति नहीं है। दूसरी परीक्षा सिर्फ उन्हीं विषयों को दोबारा देने के लिए है जो पहली परीक्षा में पहले ही दिए जा चुके हैं।

यह नई व्यवस्था सिर्फ एक परीक्षा के दबाव को कम करने और आपको सच में एक दूसरा मौका देने के लिए बनाई गई है — इसका सही इस्तेमाल करें, सिर्फ उन्हीं विषयों में दोबारा बैठें जिनसे आपका प्रतिशत वाकई बेहतर होगा, और नतीजा हर हाल में आपके पक्ष में रहेगा। आपकी परीक्षाओं के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं!

आगे पढ़ें: तैयारी परखने के लिए पिछले सालों के प्रश्न पत्र और चैप्टर-वाइज़ नोट्स यहाँ देखें।

सीबीएसई कक्षा 10 री-अटेम्प्ट नियम 2026: पूरी जानकारी

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