2025-26 सत्र से CBSE ने कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा के लिए पुराना “एक बार में सब कुछ” पैटर्न बदल दिया है — अब बोर्ड एग्जाम साल में दो बार होगा। यह बदलाव नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की सिफारिशों के तहत लाया गया है, ताकि स्टूडेंट्स पर एक ही एग्जाम के “एक शॉट” वाले प्रेशर को कम किया जा सके। इस पोस्ट में पूरा पैटर्न — दोनों एग्जाम विंडो, किसे दोनों में बैठना जरूरी है, मार्क्स कैसे जुड़ते हैं और पुराने सिस्टम से क्या बदला है — आसान भाषा में समझाया गया है।
नया टू-एग्जाम पैटर्न है क्या?
CBSE ने इसे “Two Board Examinations in Class X” नाम से नोटिफाई किया है। मतलब अब कक्षा 10 का बोर्ड एग्जाम एक नहीं, बल्कि दो फेज़ में होगा — दोनों ही पूरे सिलेबस पर आधारित होंगे, कोई हाफ-सिलेबस या शॉर्टकट नहीं। पहला एग्जाम सबके लिए अनिवार्य है, दूसरा एग्जाम स्कोर सुधारने या कुछ सब्जेक्ट क्लियर करने के मकसद से रखा गया है।
दोनों एग्जाम विंडो
| फेज़ | तारीखें (2025-26 सत्र) | सिलेबस | किसके लिए |
|---|---|---|---|
| पहला एग्जाम (मुख्य) | 17 फरवरी – 9/11 मार्च 2026 | पूरा सिलेबस | सभी कक्षा 10 स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य |
| दूसरा एग्जाम | 15 – 21 मई 2026 | पूरा सिलेबस (फिर से) | पहले एग्जाम में शामिल स्टूडेंट्स — इम्प्रूवमेंट या कंपार्टमेंट के लिए |
हर सत्र में असली तारीखें CBSE अपने ऑफिशियल डेट शीट में नोटिफाई करता है, इसलिए हमेशा cbse.gov.in पर लेटेस्ट डेट शीट चेक करें।
किसे दोनों एग्जाम में बैठना जरूरी है?
पहले एग्जाम में बैठना सभी कक्षा 10 स्टूडेंट्स के लिए compulsory है — इसके बिना दूसरे एग्जाम में बैठने की एलिजिबिलिटी ही नहीं बनती। दूसरे एग्जाम (मई) में तीन तरह के स्टूडेंट्स आते हैं:
- पास हुए स्टूडेंट्स: जिन्होंने पहला एग्जाम पास कर लिया, वे स्कोर बेहतर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा 3 सब्जेक्ट (साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस या कोई एक भाषा) दोबारा दे सकते हैं। यह पूरी तरह ऑप्शनल है।
- 1-2 सब्जेक्ट में फेल स्टूडेंट्स (कंपार्टमेंट): इन्हें फेल सब्जेक्ट क्लियर करने के लिए मई एग्जाम में मौका मिलता है, बिना पूरा साल बर्बाद किए।
- 3 या ज्यादा सब्जेक्ट में फेल स्टूडेंट्स: ये मई एग्जाम के लिए एलिजिबल नहीं हैं। इन्हें “Essential Repeat” कैटेगरी में रखा जाता है और अगले साल के फरवरी वाले मेन एग्जाम में दोबारा बैठना होता है।
ध्यान रहे — री-अटेंप्ट सिर्फ उन्हीं सब्जेक्ट्स में मिलता है जिनमें बोर्ड एग्जाम (external) का वेटेज ज्यादा हो, यानी साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और लैंग्वेज सब्जेक्ट्स। इंटरनल असेसमेंट सिर्फ एक बार, मेन एग्जाम से पहले ही होता है — मई एग्जाम के लिए दोबारा नहीं होता।
दोनों एग्जाम के स्कोर कैसे मिलते हैं?
यहीं पर सबसे बड़ी राहत है — “बेटर ऑफ द टू” पॉलिसी। जिस सब्जेक्ट में स्टूडेंट दूसरा एग्जाम देता है, फाइनल मार्कशीट पर उसी सब्जेक्ट के दोनों अटेम्प्ट में से जो स्कोर ज्यादा हो, वही चढ़ता है। अगर मई एग्जाम में मार्क्स पहले से कम आ जाएं, तो पहले एग्जाम वाला स्कोर ही मान्य रहेगा — मतलब दूसरा एग्जाम देने से नुकसान होने का कोई डर नहीं। तीसरा मौका (उसी सत्र में) नहीं मिलता — दो एग्जाम के बाद जो भी बेहतर स्कोर बनता है, वही फाइनल होता है, और CBSE दोनों नतीजों के बाद एक ही कंसॉलिडेटेड फाइनल मार्कशीट जारी करता है।
क्वेश्चन पेपर पैटर्न में क्या बदला?
मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन पहले जैसा ही है — थ्योरी पेपर 80 मार्क्स और इंटरनल असेसमेंट 20 मार्क्स का। लेकिन क्वेश्चन टाइप में बड़ा बदलाव है: अब ज्यादातर सब्जेक्ट्स के पेपर में करीब 50% तक सवाल कॉम्पिटेंसी-बेस्ड होंगे — यानी MCQ, केस-स्टडी और सोर्स-बेस्ड सवाल, जो सीधे रटने के बजाय समझ और एप्लिकेशन टेस्ट करते हैं। बाकी हिस्सा शॉर्ट और लॉन्ग आंसर टाइप डिस्क्रिप्टिव सवालों का रहता है।
पुराने सिस्टम से क्या अलग है?
| पुराना सिस्टम | नया सिस्टम (2025-26 से) |
|---|---|
| साल में सिर्फ एक बोर्ड एग्जाम | साल में दो एग्जाम विंडो — फरवरी और मई |
| पास स्टूडेंट के लिए उसी साल स्कोर सुधारने का मौका नहीं | पास स्टूडेंट भी 3 सब्जेक्ट तक इम्प्रूवमेंट दे सकते हैं |
| फेल होने पर अलग से, बाद में कंपार्टमेंट एग्जाम | कंपार्टमेंट मई विंडो में ही, बिना साल गंवाए |
| सवाल ज्यादातर रटने और सीधे जवाब वाले | करीब 50% सवाल एप्लिकेशन व रीजनिंग टेस्ट करने वाले |
याद रखने वाली मुख्य बातें
- पहला एग्जाम सबके लिए जरूरी, पूरा सिलेबस, फरवरी-मार्च में।
- दूसरा एग्जाम मई में — सिर्फ पहले एग्जाम में बैठे स्टूडेंट्स के लिए, ज्यादा से ज्यादा 3 सब्जेक्ट।
- दोनों में से बेहतर स्कोर फाइनल मार्कशीट पर आता है।
- 3+ सब्जेक्ट में फेल स्टूडेंट अगले साल फरवरी में दोबारा बैठेंगे।
अगर आप या आपका बच्चा इस नए पैटर्न से गुजर रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं — यह सिस्टम स्टूडेंट्स को ही फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है। पूरे सिलेबस पर मजबूत पकड़ बनाइए, कॉन्सेप्ट्स को ठीक से समझिए, बाकी दोनों एग्जाम मिलकर संभाल लेंगे। ऑल द बेस्ट!
आगे पढ़ें: Class 10 के चैप्टर-वाइज़ नोट्स और पिछले सालों के प्रश्न पत्र यहाँ देखें।
